Saturday, 17 September 2016

पहली बारिश


रिमझिम गीतों से महकी ये जो इस पहली बारिश ने झूम मचायी है,

लगता है मुझे भी बहका के बहाा ले जाने आयी है,

मै भी कहााँ रुकना चाहती हूँ, बह जाना चाहती हूँ साथ तेरे,

बस शर्त इतनी सी है कि गर देदूं मै खुद को तुझे,

तो न डुबाना न किनारे पे लाके छोड़ना मुझे,

कुछ ऐसे ले जाना आज कि जैसे बस मुझे पार लगाने आई है।



एहसास है कि तेरे साथ मिट्टी मे लोट मटमैली हो जाऊँगी मै,

कहीं बीच बीच मे कंकड़ पथ्थर से टकराऊँगी मै,

शायद घिसड़ते हुये बहुत चोट भी खाऊँगी मै,

पर जानती हूँ कि धुल जायेंगे सारे दर्द जैसे ही सागर से मिल जाऊँगी मै,

तो क्यों रहे ये डर की दीवार,आके बतादे कि तू मुझे अपनाने के लिये आयी है।



हमेशा तुझे खिड़की पे बैठ के निहारा है मैने, पहले कुछ सहमी सी बादलों से झांकती है तू,

और फिर टिपटिप कर जमीं का मिजाज जांचती है तू,

जब लगता है तुझे कि वक्त सही है तेरा तो पैरों मे घुंगरू बाधंती है तू,

देख के तुझे दौड़ी चली आती हूँ मिलने, जिस तरह से झिम झिम कर के नाचती है तू,

इसलिये कहती हूँ कि तोड़दे इन बन्दिशों को और खुल के नाचले जरा, जैसे घुंगरू को तोड़ के बिखराने आयी है।



पा कर तुझे मै भी मुसकुरा लेती हूँ, तेरी धुन मे थोड़ा सा गुनगुना लेती हूँ,

थिरक लेती हूँ मै भी साथ तेरे, घुंगरू न सही पायल तो छनका लेती हूँ,

और जब अचानक छोड़ के चली जाती है तू, तो घीली मिट्टी मे तेरी खुशबू पा लेती हूँ,

पता नही हर बार क्यों जाना जरूरी है तेरा, जबकि जब भी आती है तू आसमान छोड़ कर,

लगता है जैसे जमीं पे ही बसने के लिये आयी है।



तेरी कुछ बूंदे अभी बाकी थी, सोचा उन्हे भी खुद मे समा लेने दूँ,

फिजा मे कुछ आलम था ऐसा खामोशी थी हर जगह,

गुमसुम सी हंसी होठों पे मेरे, जाने ये कैसी उदासी थी,

कि बूंदे बरसी आखों से मेरी, समायी तू मुझमे कुछ इस तरह,

देख के मेरा दीवानापन वापस से जो बरसी तू,

ऐसा लगा दिल को मेरे कि मुझपे सारी खुशियां लुटाने आयी है।



झूला झूलते हुए बस यही बात समझ आयी मुझे, कितनी पागल थी जो पहले साथ न जा पायी तेरे,

शायद डरती थी बीच मे छूट जाने से कहीं, वरना तूने तो हजारों ख्वाहिशें फरमायी थी,

पर झल्ली तू भी कम नही, देखा मैनै तेरे इकरार मे कितनी गहरायी थी,

बरसती थी तो बस गले लगाने के लिये, चूमती थी तेरी हर बूंद मुझे,

तेरे हर स्पर्श ने यूं भिगोया है मुझे, कि देख आज तेरी ओर खिची चली आयी हूँ,

पर अरमानो के अब इधर भी निकलने लगे हैं, हम भी उड़ने लगे हैं और बहकने लगे हैं,

जो बात अनसुनी रह गयी थी वो सुनने लगे हैं और सुनाने लगे हैं,

आ खोल दे तू भी दिल के राज सभी और दिखादे दुनिया को, कि कम से कम हमे तो महोब्बत रास आयी है।



चल ले चलूँ मै कहीं दूर तुझे, तू नही तो मै ही मांग लेती हूँ तुझे,

साथ रहना है तो छोड़ के आना होगा तुझे,

जंजीरों सा तेरा जहााँ तोड़ के आना होगा तुझे,

फैसला ये कर कि किस ओर जाना है तुझे,

या तो मुंह मोड़ सदा के लिये, या कहदे के साथ आना है तुझे,

एक इशारा बहुत है मुझे, बस कुछ बू्ंद आाँसू ही तो टपकाने है तुझे,

ना देर करके यूं धड़कने बड़ा, छुपा नही है मुझसे कि इश्क है तुझे,

तो चल हाथ पकड़ ले मेरा जैसे कभी न साथ छोड़ने के लिये आयी है।

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